पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के वर्षों में जिस नाम ने सबसे अधिक सुर्खियाँ बटोरीं, वह है सायोनी घोष। कभी बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री रही सायोनी आज संसद में अपनी दमदार आवाज़ और तीखे सवालों के लिए जानी जाती हैं। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा उतनी ही उतार‑चढ़ाव भरी रही है जितनी उनकी लोकप्रियता।
फिल्मी पर्दे से सियासी मंच तक
सायोनी घोष का जन्म 1993 में कोलकाता में हुआ। उन्होंने साउथ पॉइंट हाई स्कूल और बाद में कोलकाता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें एंकरिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गहरी रुचि थी। 2011 में उन्होंने फिल्म शत्रु में एक छोटा सा रोल किया, जिसने उनके टॉलीवुड करियर की शुरुआत की। इसके बाद राजकहानी (2015), ब्योमकेश और चिड़ियाखाना (2016) जैसी फिल्मों में अभिनय कर उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
राजनीति में प्रवेश
2011 में ममता बनर्जी ने बंगाल में लेफ्ट का गढ़ ध्वस्त कर सत्ता संभाली। इसी दौर में सायोनी धीरे‑धीरे राजनीतिक बहसों में दिखने लगीं। 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने उन्हें टीएमसी में शामिल कर आसनसोल दक्षिण से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वे चुनाव हार गईं, लेकिन पार्टी में उनका कद बढ़ता गया।
विवाद और गिरफ्तारी
सायोनी घोष का नाम कई विवादों से जुड़ा रहा। त्रिपुरा में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उनके कुछ पोस्ट भी विवादों में रहे। 2023 में उन्हें टीएमसी यूथ विंग की अध्यक्ष बनाया गया, जो पार्टी के इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष थीं। इसी दौरान भर्ती घोटाले की जांच में ईडी ने उनसे लंबी पूछताछ भी की।
लोकसभा चुनाव और संसद में पहचान
2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जाधवपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया। यह वही सीट थी जहाँ से 1984 में ममता बनर्जी ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। सायोनी ने इस चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की और संसद पहुँचीं। संसद में उनके भाषणों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया। वे शेरो‑शायरी के अंदाज़ में प्रधानमंत्री और सरकार से सवाल करतीं और जनता की समस्याओं पर मुखरता से बोलतीं।
बगावत और राजनीतिक मोड़
2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा और बीजेपी ने पहली बार बंगाल में सरकार बनाई। इसके बाद पार्टी में बड़े पैमाने पर बगावत हुई। इसी दौरान सायोनी घोष का नाम भी उन नेताओं में शामिल हुआ जिन्होंने ममता बनर्जी से दूरी बना ली। यह वही सायोनी थीं जो कुछ समय पहले तक ममता को प्रधानमंत्री बनाने की बात करती थीं। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया और विपक्षी खेमे में खड़ी दिखाई दीं।
सायोनी घोष की कहानी राजनीति की अनिश्चितताओं का सबसे बड़ा उदाहरण है। अभिनेत्री से सांसद तक का सफर, विवादों से लेकर संसद में लोकप्रियता और फिर बगावत तक—उनकी यात्रा बताती है कि राजनीति में वफादारी और समीकरण कितनी जल्दी बदल जाते हैं। आज सायोनी घोष बंगाल की राजनीति की सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं, और आने वाले समय में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति में और भी अहम हो सकती है।








