29 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपये और एक QR कोड

सोचो ज़रा, दस साल पहले अगर किसी ने कहा होता कि एक दिन चाय वाला भी मोबाइल से पैसे लेगा तो शायद हम हंस देते। मगर आज यही हो रहा है। हर गली, हर नुक्कड़, हर छोटी सी दुकान पर एक QR कोड लटका हुआ है और लोग बिना एक रुपया निकाले भुगतान कर रहे हैं। यह कोई जादू नहीं है, यह यूपीआई है।

मई 2026 में यूपीआई ने एक बार फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है। राष्ट्रीय भुगतान निगम के ताज़े आंकड़े बताते हैं कि इस महीने कुल 2 हज़ार 32 करोड़ लेनदेन हुए और इनकी कुल रकम 29 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपये थी। पिछले साल के मुकाबले यह 24 प्रतिशत ज़्यादा है।

यह संख्याएं सुनकर सिर चकरा जाता है, है ना,वो पहला महीना याद है जब सिर्फ 373 लेनदेन हुए थे|

2016 में जब यूपीआई की शुरुआत हुई थी तो पहले पूरे महीने में सिर्फ 373 लेनदेन हुए थे। सोचो, मात्र 373। और आज हर एक दिन में 74 करोड़ 80 लाख लेनदेन हो रहे हैं। मतलब हर सेकंड हज़ारों लोग यूपीआई से पैसे भेज और ले रहे हैं। दस साल में 12 हज़ार गुना बढ़त। यह कोई छोटी बात नहीं है।

मुझे याद है जब हमारे मोहल्ले में सब्ज़ी वाले काका हमेशा कहते थे कि उनके पास मशीन नहीं है तो कैश लाओ। आज उनके ठेले पर भी QR कोड है। यह बदलाव किसी सरकारी आदेश से नहीं आया, यह आम लोगों की ज़रूरत ने लाया।

भारत से निकलकर दुनिया तक पहुंचा यूपीआई

एक बात और जो हमे सबसे ज़्यादा गर्व देती है वो यह है कि यूपीआई अब सिर्फ भारत की बात नहीं रही। संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर यानी कुल 8 देशों में यूपीआई चल रहा है। आज दुनिया के कुल तत्काल डिजिटल भुगतान में से 49 प्रतिशत अकेला भारत करता है।

यानी दुनिया के आधे से ज़्यादा रियल टाइम पेमेंट भारत से हो रहे हैं। यह वो भारत नहीं है जिसे दुनिया कभी पिछड़ा कहती थी।

आज यूपीआई से 703 बैंक जुड़े हुए हैं। शुरुआत में केवल 21 बैंक थे। इसका मतलब क्या है, मैं बताता हूं। जो लोग पहले बैंक की लंबी लाइनों से डरते थे, जिन्हें बैंक जाना एक बड़ा काम लगता था, आज वो भी घर बैठे पैसे भेज रहे हैं। एक किसान जिसके गांव में बैंक नहीं है वो भी अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा है।

यही असली क्रांति है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है

29 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपये का यह रिकॉर्ड सुनने में बस एक बड़ा नंबर लगता है। मगर जब मैं सोचता हूं कि इस रकम के पीछे करोड़ों छोटे दुकानदार हैं, करोड़ों मज़दूर हैं जो घर पैसे भेज रहे हैं, करोड़ों छात्र हैं जो फीस जमा कर रहे हैं, तब यह नंबर सिर्फ नंबर नहीं रहता। यह नंबर एक नई भारत की कहानी है।

जिस देश में कभी बैंक खाता खुलवाना भी बड़ी बात होती थी, उसी देश ने आज दुनिया को डिजिटल भुगतान सिखाना शुरू कर दिया है। और यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा।

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