शामली के झिंझाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश फुरकान को लेकर जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। पुलिस जांच के मुताबिक फुरकान हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के आंदोलन में भी शामिल हुआ था। पुलिस अब उसके दिल्ली प्रवास और वहां के संपर्कों की जांच कर रही है।
पुलिस को कैसे मिली यह जानकारी?
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस जांच में सामने आया कि मन्ना माजरा गांव का एक युवक फुरकान के लगातार संपर्क में था। दोनों दिल्ली में आंदोलन के दौरान करीब दो दिन तक साथ रहे थे। शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, पुलिस अब इस कड़ी से जुड़े अन्य लोगों और फुरकान के संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस अब क्या पता लगाने की कोशिश कर रही है?
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फुरकान आंदोलन के दौरान किन-किन लोगों से मिला और दिल्ली जाने के पीछे उसका उद्देश्य क्या था। इसके लिए आंदोलन स्थल के आसपास की CCTV फुटेज, उसके मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक ऐसी कोई पुष्टि सामने नहीं आई है कि आंदोलन से जुड़े लोगों का फुरकान की आपराधिक गतिविधियों से कोई संबंध था। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कैराना पलायन मामले में फुरकान की क्या भूमिका थी?
फुरकान का नाम कैराना में व्यापारियों को धमकी देने और 2014 के व्यापारी नेता विनोद सिंघल हत्याकांड के बाद चर्चा में आया था। उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, विनोद सिंघल की हत्या के बाद कैराना में डर का माहौल बढ़ा और कई व्यापारियों ने पलायन किया। फुरकान पर ईश्वरचंद उर्फ बिल्लू से रंगदारी मांगने का भी आरोप लगा था, जिसके बाद उनका परिवार पानीपत चला गया था।
कैराना पलायन का मुद्दा 2015-16 में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। तत्कालीन भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने पलायन करने वाले परिवारों की सूची जारी की थी। उपलब्ध रिपोर्टों में इस सूची में 316 परिवारों का उल्लेख मिलता है, इसलिए 346 परिवारों का आंकड़ा इस्तेमाल करना सही नहीं होगा।
फुरकान का आपराधिक इतिहास क्या रहा?
फुरकान कैराना का कुख्यात अपराधी था और उसका नाम मुकीम काला गैंग से जुड़ा रहा है। पुराने पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों में उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और रंगदारी समेत कई मामले दर्ज होने की जानकारी मिलती है। 2026 की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उसके खिलाफ करीब 30 मामले दर्ज बताए गए थे।
2014 में कैराना के व्यापारी नेता विनोद सिंघल की हत्या के मामले में उसका नाम सामने आया था। इसके बाद 2017 में पुलिस मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। बाद में वह जमानत पर बाहर आया और उसके खिलाफ फिर से आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामले सामने आए।
शामली में कैसे हुआ एनकाउंटर?
पुलिस के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को झिंझाना थाना क्षेत्र में रंगाना फार्म के पास बदमाशों के मौजूद होने की सूचना पर पुलिस टीम पहुंची थी। पुलिस का दावा है कि वहां बदमाशों की ओर से फायरिंग की गई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई। गोली लगने से घायल फुरकान की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। पुलिस ने उसकी पहचान एक लाख रुपये के इनामी बदमाश के रूप में की।
क्या अब इस मामले पर सियासी असर भी दिख सकता है?
फुरकान का नाम पहले से ही कैराना पलायन और कानून-व्यवस्था के मुद्दे से जुड़ा रहा है। उसके एनकाउंटर के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दल द्वारा इसे चुनावी मुद्दा बनाए जाने को फिलहाल संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि तय रणनीति के रूप में।
फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य फोकस फुरकान के आपराधिक नेटवर्क, उसके संपर्कों और जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान उसकी गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने पर है। जांच पूरी होने के बाद ही उसके दिल्ली प्रवास और वहां बने संपर्कों की वास्तविक भूमिका सामने आ सकेगी।










